भुवनेश्वरी मंदिर का पत्थर का घाट गोमती नदी में जाकर मिल गया है। एक दिन ग्रीष्म-काल की सुबह त्रिपुरा के महाराजा गोविन्दमाणिक्य स्नान करने आए हैं, उनके भाई नक्षत्रराय भी साथ हैं। ऐसे समय एक छोटी लडकी अपने छोटे भाई को साथ लेकर उसी घाट पर आई। राजा का वस्त्र खींचते हुए पूछा, ‚तुम कौन हो?‘
राजा मुस्कराते हुए बोले, ‚माँ, मैं तुम्हारी संतान हूँ।‘
लडकी बोली, ‚मुझे पूजा के लिए फूल तोड़ दो ना!‘
राजा बोले, ‚अच्छा, चलो।‘
अनुचर बेचैन हो उठे। उन्होंने कहा, ‚महाराज, आप क्यों जाएँगे, हम तोड़े दे...
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Sprache Hindi ● Format EPUB ● Seiten 173 ● ISBN 9781329909298 ● Dateigröße 0.4 MB ● Verlag Sai ePublications ● Erscheinungsjahr 2017 ● herunterladbar 24 Monate ● Währung EUR ● ID 5317252 ● Kopierschutz ohne